• भारत की समृद्ध विरासत में ही छिपे हैं वेस्ट मैनेजमेंट के होम कंपोस्टिंग जैसे मजबूत विकल्प
• देशभर के शहरों में पहुंच चुका है ‘हर घर कंपोस्टिंग’ के लक्ष्य से भेजा जा रहा संदेश
• विभिन्न शहरों में नागरिक खुद की बनाई खाद से घरों की छतों पर उगा रहे हैं सब्जियां
एक समय था, जब हमारे देश के हर घर में दादी-नानी एक ऐसा बर्तन रखती थीं, जिसमें रसोई से निकलने वाला गीला कचरा इकट्ठा किया जाता था और कुछ समय बाद उसे खाद के रूप में इस्तेमाल किया जाता था। आज जब वेस्ट मैनेजमेंट दुनिया के सामने चुनौती बनकर खड़ा है, तो हमारा देश दादी-नानी के सिखाए वही पुराने तरीके अपनाकर कचरे को खत्म करने की दिशा में सबसे तेज गति से कदम बढ़ा रहा है। यहां आवासन और शहरी कार्य मंत्रालय के स्वच्छ भारत मिशन-शहरी 2.0 के अंतर्गत रिड्यूस, रीसाइकल, रीयूज (आरआरआर) की अवधारणा कर अनुसरण करते हुए बड़े पैमाने पर वेस्ट सेग्रीगेशन किया जा रहा है। इस प्रक्रिया के माध्यम से न सिर्फ गीले और सूखे कचरे को अलग किया जा रहा है, बल्कि देशभर के विभिन्न शहरों में सूखे कचरे से ऊर्जा और गीले कचरे से खाद बनाने के लिए लगातार प्लांट्स भी लगाए जा रहे हैं। इतना ही नहीं, वर्तमान समय में यहां जनभागीदारी से वेस्ट कंपोस्टिंग एक जनांदोलन में परिवर्तित हो चुकी है।
आंध्र प्रदेश के विजयवाड़ा में नगर निगम ने हाल ही में एक वरिष्ठ नागरिक के.शुभलक्ष्मी की कहानी सभी के साथ
साझा करते हुए नागरिकों को होम कंपोस्टिंग से जुड़ी उनकी शानदार पहल के बारे में अवगत कराया। जहां होम
कंपोस्टिंग की मदद से रसोईघर से निकलने वाले गीले कचरे को बगीचे के लिए इस्तेमाल होने वाली स्वर्ण रूपी खाद
में तब्दील किया जा रहा है।
तेलंगाना के सिद्दीपेट में ‘स्वच्छ बाड़ी’ के नाम से अपनी तरह का पहला वेस्ट मैनेजमेंट लर्निंग सेंटर बनाया
गया है। वहां युवा पीढ़ी को प्रशिक्षित करने के लिए होम कंपोस्टिंग से लेकर कम्यूनिटी कंपोस्टिंग मॉडल्स तक
उपलब्ध कराए गए हैं। इतना ही नहीं, यहां आने वाले समय में 141 नगर निगम क्षेत्रों में ठीक इसी तरह की स्वच्छ
बाड़ी विकसित करने की योजना है।
चंडीगढ़ निवासी कमलजीत कौर देओल की कहानी हाल ही में सुर्खियों में आई, जिन्होंने होम कंपोस्टिंग के बारे में जागरूकता कार्यक्रम चलाने से पहले ही कोरोना काल के दौरान घर पर रसोई के बचे गीले कचरे से खाद बनाने की यह प्रक्रिया शुरू कर दी थी। आज अपने शहर को साफ, हरित और स्वच्छ बनाने के लिए उनके द्वारा किए गए कार्यों से देश के तमाम नागरिक प्रेरणा लेकर होम कंपोस्टिंग कर रहे हैं। चंडीगढ़ नगर निगम ने हाल ही में ‘तीज महोत्सव’ के दौरान विशेष तौर पर स्टॉल लगाकर नागरिकों को होम कंपोस्टिंग के बारे में प्रशिक्षण दिया।
स्वच्छ भारत मिशन-शहरी 2.0 के अंतर्गत पंजाब में ‘ट्यूलिप इंटर्न्स और स्कूली छात्रों’ को भी होम कंपोस्टिंग
समेत वेस्ट सेग्रीगेशन के विभिन्न माध्यम दिखाए एवं समझाए गए। इसके अलावा यहां ‘बागवानी के वेस्ट से भी
कंपोस्ट खाद’ बनाने के बारे में जागरूक किया गया। ताकि वह खुद भी सीखें और दूसरों को भी इसके प्रति जागरूक
करें।
आवासन और शहरी कार्य मंत्रालय के स्वच्छ भारत मिशन-शहरी 2.0 के अंतर्गत हमारा जो देश वेस्ट मैनेजमेंट की दिशा में दिनोंदिन नई ऊंचाइयों को छूते हुए सबसे तेज गति से आगे बढ़ रहा है, इसके पीछे यही जनशक्ति है। यही जनशक्ति है जो हर अभियान को, किसी भी आंदोलन को जनांदोलन में तब्दील कर देती है और कोई भी लक्ष्य बड़ा नहीं रहता। ऐसी तस्वीरें देशभर से आ रही हैं, जहां विभिन्न शहरों में कहीं बच्चों को होम कंपोस्टिंग सिखाई जा रही है, तो कहीं गृहिणियां घरों में कच्ची सब्जियों और फलों के छिलकों से कंपोस्ट खाद घर में ही बना रही हैं। इतना ही नहीं, पर्यावरण प्रेमी बड़े-बुजुर्गों को भी अपने घरों की छतों पर अपनी ही बनाई खाद से पौधों को सींचते देखा जा रहा है। यह जागरूकता न सिर्फ पौधों को नया जीवन दे रही है, बल्कि प्रतिदिन घरों से निकलने वाले गीले कचरे को लैंडफिल तक पहुंचने से रोक रही है, जो अपने आप में एक बड़ी उपलब्धि है।
होम कंपोस्टिंग से लेकर रीसाइक्लिंग तक, हमें वेस्ट मैनेजमेंट के कई तरीके हमारी पुरानी और सशक्त विरासत से ही मिले हैं। उस समय भी इस्तेमाल हो चुके पुराने कपड़ों और प्लास्टिक का पुन: उपयोग करके दादी-नानी गर्मी से बचने के लिए पंखे या बैठने के आसन बना लिया करती थीं। कई तरह का सूखा कचरा चूल्हे में ईंधन के रूप में इस्तेमाल कर भोजन तैयार किया जाता था। हर एक पुराने अभ्यास में किसी न किसी समस्या का समाधान छुपा है, इसी तरह से हर घर की रसोई से निकलने वाले ‘वेट वेस्ट’ यानी गीले कचरे के प्रबंधन के लिए होम कंपोस्टिंग शानदार तरीका है, जिसके जरिए घर में ही खाद बनाकर कचरे को खत्म करने का मजबूत विकल्प मिल जाता है।
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